छत्तीसगढ़

रेत माफिया बेनकाब, पुलिस की घेराबंदी में फंसे 14 हाईवा

खनिज अधिनियम के तहत चालकों और मालिकों पर सख्त कार्रवाई

जांजगीर-चांपा। जिले में बेखौफ चल रहे अवैध रेत उत्खनन और परिवहन पर आखिरकार पुलिस ने प्रहार किया है। थाना अकलतरा पुलिस ने देर रात हाईवे पर दबिश देकर अवैध रूप से रेत ढो रहे 14 हाईवा वाहनों को जप्त कर रेत माफियाओं के मंसूबों पर पानी फेर दिया। यह पूरी कार्रवाई विजय कुमार पाण्डेय, पुलिस अधीक्षक जांजगीर-चांपा के सख्त निर्देशन में चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत की गई। लंबे समय से जिले में अवैध रेत उत्खनन और परिवहन की शिकायतें सामने आ रही थीं। आरोप है कि रात के अंधेरे में नियम-कायदों को ताक पर रखकर हाईवा वाहन बेखौफ सड़कों पर दौड़ रहे थे। एसडीओपी अकलतरा प्रदीप कुमार सोरी के नेतृत्व में पुलिस टीम ने योजनाबद्ध तरीके से घेराबंदी कर हाइवे रोड पर कार्रवाई की। जैसे ही रेत से भरे हाईवा वाहन मौके पर पहुंचे, पुलिस ने तत्काल उन्हें रोककर दस्तावेजों की जांच की। संतोषजनक दस्तावेज प्रस्तुत न कर पाने पर सभी 14 वाहनों को मौके पर ही जप्त कर लिया गया। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि संबंधित वाहन चालकों एवं मालिकों के विरुद्ध गौण खनिज अधिनियम और अन्य प्रासंगिक विधिक धाराओं के तहत सख्त कार्रवाई की जा रही है। सूत्रों के अनुसार, अवैध खनन के इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भी जांच की जा रही है। जिले में अवैध रेत कारोबार लंबे समय से पर्यावरण और राजस्व को भारी नुकसान पहुंचा रहा है। नदियों का अस्तित्व खतरे में है और शासन को करोड़ों रुपए की राजस्व हानि हो रही है। ऐसे में पुलिस की यह कार्रवाई रेत माफियाओं के लिए साफ संदेश है कि अब अवैध कारोबार किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पुलिस प्रशासन ने चेतावनी दी है कि अवैध उत्खनन और परिवहन के खिलाफ अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा। यदि कोई भी व्यक्ति इस अवैध कारोबार में लिप्त पाया गया तो उसके विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

कौन दे रहा था संरक्षण?

14 हाईवा का एक साथ पकड़ा जाना इस ओर इशारा करता है कि अवैध रेत परिवहन कोई छोटी-मोटी गतिविधि नहीं थी। सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इतनी बड़ी संख्या में वाहन बेखौफ कैसे दौड़ रहे थे? क्या इस खेल के पीछे कोई संगठित नेटवर्क सक्रिय था? पुलिस अब सिर्फ वाहनों तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे तंत्र की तह तक जाने की तैयारी में है। नियमों को ताक पर रखकर रात के अंधेरे में रेत ढोने का खेल लंबे समय से जारी था। नदियों का सीना चीरकर निकाली जा रही रेत से न केवल पर्यावरण को नुकसान हो रहा था, बल्कि शासन को भी भारी राजस्व हानि उठानी पड़ रही थी। 14 हाईवा की जप्ती ने इस अवैध कारोबार की परतें खोल दी हैं। आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे संभव माने जा रहे हैं।

सिर्फ चालक नहीं, असली खिलाड़ी कौन?

कार्रवाई में 14 हाईवा जरूर जप्त हुए, लेकिन सवाल इससे कहीं बड़ा है। क्या सिर्फ चालक और छोटे मालिक ही इस पूरे खेल के जिम्मेदार हैं, या फिर इनके पीछे कोई बड़ा आर्थिक नेटवर्क सक्रिय है? सूत्र बताते हैं कि बिना संरक्षण के इतनी संगठित ढंग से अवैध परिवहन संभव नहीं। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच केवल औपचारिक कार्रवाई तक सीमित रहती है या फिर रेत के इस काले खेल के असली सूत्रधारों तक भी पहुंचती है। यदि जांच निष्पक्ष और गहराई से हुई, तो कई चौंकाने वाले नाम सामने आ सकते हैं।

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